रिपोर्ट: भारतीय स्वदेशी विज्ञान आंदोलन (विभा दिल्ली) की स्थापना के 30 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष संगोष्ठी

नयी दिल्ली | 14 दिसम्बर 2025

भारतीय स्वदेशी विज्ञान आंदोलन (विज्ञान भारती दिल्ली) ने अपनी स्थापना के गौरवशाली 30 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 14 दिसम्बर 2025 को एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस गरिमामयी अवसर पर प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ने पर गहन विमर्श हुआ। कार्यक्रम में विशेषज्ञों के साथ-साथ एक नई शिक्षिका प्रतिनिधि ने भी प्रतिभागी के रूप में अपने अत्यंत सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए।

मुख्य व्याख्यान और नवाचार पर विमर्श:
रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी के शिक्षा निदेशक डॉ. अनिल कुमार और राजकीय कन्या महाविद्यालय, नसीराबाद की प्रधानाचार्या डॉ. अनीता खुराना ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। डॉ. कुमार ने नवाचार, आत्मनिर्भर भारत और नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के क्रियान्वयन पर बल दिया, वहीं डॉ. खुराना ने वैदिक विज्ञान के सिद्धांतों की आधुनिक समय में प्रासंगिकता को रेखांकित किया।

संस्था की विकास यात्रा और त्रि-आयामी दृष्टिकोण:
ग्रेटर नोएडा से जुड़े संस्था के अध्यक्ष डॉ. डी.पी. भट्ट ने विज्ञान भारती दिल्ली की ऐतिहासिक यात्रा का विवरण दिया। उन्होंने संस्था की बहुचर्चित “त्रि-आयामी दृष्टिकोण” नीति का उल्लेख करते हुए बताया कि 5 दिसंबर 1994 को दिल्ली इकाई की औपचारिक स्थापना से पूर्व ही प्रो. के.आई. वासु सर के नेतृत्व में दक्षिण भारत में ग्रामीण विकास के ठोस कार्य प्रारंभ हो चुके थे। डॉ. भट्ट ने गर्व के साथ साझा किया कि गत 30 वर्षों में विभा दिल्ली द्वारा आयोजित राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय अधिवेशनों, सेमिनारों और रिफ्रेशर कोर्सेज के माध्यम से जो नीतियां और रिपोर्ट समाज को अर्पित की गईं, वे आज सरकारी स्तर पर भी लागू हैं।

परिचय एवं विशिष्ट सहभागिता:

प्रयागराज से कार्यक्रम में सम्मिलित हुए कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. विकास श्रीवास्तव ने सभी व्याख्यानकर्ताओं का परिचय कराया और उनके वैज्ञानिक योगदान की सराहना की,
साथ ही शोधकर्ताओं से अपनी मौलिक रचनाएं ‘स्वदेशी विज्ञान पत्रिका’ (बहुभाषी पत्रिका) में भेजने का आग्रह किया।

समापन एवं निष्कर्ष:
कार्यक्रम की समाप्ति पर निष्कर्ष टिप्पणी प्रस्तुत करते हुए उपाध्यक्षा डॉ. रश्मि शर्मा ने कहा कि आज की प्रस्तुतियों ने विज्ञान, परंपरा और वैश्विक प्रगति को देखने का एक नया परिप्रेक्ष्य प्रदान किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पारिस्थितिक संतुलन के बिना समग्र और टिकाऊ विकास (धारणा क्षम विकास) असंभव है। पृथ्वी पर जीवन के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए वैदिक विज्ञान के शाश्वत सिद्धांतों की ओर लौटना अनिवार्य है।

धन्यवाद एवं शांति पाठ:
राजस्थान से कार्यक्रम का कुशल संचालन कर रहे सह-सचिव डॉ. आशुतोष पारीक ने वैदिक कल्याण मंत्रोच्चारण की सकारात्मक ऊर्जा के साथ संगोष्ठी को संपन्न किया। अंततः श्री रोशन अग्रवाल (निदेशक, सिद्धस्त इनोवेशन प्रा. लिमिटेड एवं महासचिव, विभा दिल्ली) ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

मुख्य बिंदु:

मिशन: ज्ञान, विज्ञान और प्रज्ञान के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत।

विभा दिल्ली: 1994 से 2025 तक के सफल 30 वर्ष।

विजन: स्वदेशी विज्ञान और आधुनिक तकनीक का समन्वय।